डेटिंग एप्प्स का हल्ला पिछले 2 साल में काफी बढ़ गया है हिंदुस्तान में भी। मेरे कई जानने वाले लोग भी इन डेटिंग एप्प्स पर है जिनसे मैंने कई किस्से सुन रखें है इनको लेकर। अपन ये सब एप्प्स से दूर रहे काफी सालों तक, पर कोरोना काल में बहुत समय मिला तोह आ गए अपन भी इस मायाजाल की दुनिया में। अब इस दुनिया में स्वाइप राइट-लेफ्ट, मैच- अनमैच का खेल सबको पता ही है। मेरा जितना अनुभव रहा है, मुझे इन एप्प्स की ३ मूल दिक्कतें समझ आयी है, जो मैं आप सबके साथ साझा करना चाहता हूँ । 😇

पहली समस्या – असंतुलन

इन डेटिंग एप्प्स पर लड़कियों को हर दिन अनगिनत स्वाइप राइट मिलते है। तोह उनके लिए किसी को सेलेक्ट करना आसान काम तोह बिलकुल नहीं होगा। आम जीवन में भी अगर किसी को इतने विकल्प मिलेंगे तोह कन्फ़्यूज़न और आत्म-संदेह होना स्वाभाविक है। अब इन सबके बीच लड़कियां किसको चुनें, किससे बात करें, किनको मिलें, ये लड़कियों की एक मुख्य समस्या रहती है। 😓

डेटिंग एप्प्स पर लड़कों का एकदम उल्टा हाल है। हर दिन अनगिनत स्वाइप राइट करते रहते है प्रोफ़िलों पर। अब इतने लोगों को पसंद करने के बाद भी जब उन्हें कोई रिस्पांस या मैच ना मिलें तोह आत्मविश्वास कितना नीचे गिरता होगा। सब्र और धैर्य के नाम पर जो टाइम ख़राब होता है, वो तोह पूछो मत। 😪

अब आप सोचें जब लड़कियों और लड़कों के बीच में संतुलन ही नहीं रहेगा तोह बातचीत और मिलने की आशा पूरी कैसे होगी?

दूसरी समस्या – पैसे का सहारा

इन डेटिंग एप्प्स का जो ऍल्गोरिथम होता है, वो पूरा पैसे पर चलता है। आप इन एप्प्स पर पैसे देकर अपना डेटिंग प्लान अपग्रेड कर सकते हैं, जिससे कई सुविधाएं मिलती है।। और जो आपने पैसे वाला प्लान नहीं लिया, तोह इनका ऍल्गोरिथम सुनिश्चित करता है की आपको सफलता ना के बराबर मिले। 🥺

अपने देश में कॉलेज के बच्चे भी आईफोन ले रहे है तोह वहाँ पर पैसे देकर डेटिंग प्लान अपग्रेड करना भी कोई बड़ी बात नहीं है। पर इसके बाद भी असंतुलन की समस्या मौजूद रहती है और कोई भी डेटिंग एप्प्स अपनी सफलता दर नहीं बताती है और ना ही गारंटी देती है, प्लान अपग्रेड करने पर। 😕

अब आप सोचें जब पैसे का सहारा लेना पड़े और उसके बाद भी अनिश्चितता का बोझ हो तोह बातचीत और मिलने की आशा पूरी कैसे होगी?

तीसरी समस्या – समुदाय की कमी

थोड़ी सूफियाना बात लगेगी, पर एक बात पर आप सबका ध्यान लाना चाहता हूँ। इस संसार में कोई भी रिश्ता समुदाय से ही बनता है। किसी से दोस्ती भी स्कूल, कॉलेज या मोहल्ले के समुदाय के बगैर नहीं हो सकती। रिलेशनशिप भी स्कूल, कॉलेज, ऑफिस जैसे समुदाय के बिना नहीं हो पाते है। शादी और रिश्तेदारी तोह समुदाय के बिना सोचे ही नहीं जा सकते हैं।

पर इन डेटिंग एप्प्स पर कोई समुदाय नहीं होता। यहाँ पर बस अपनी फ़िल्टर वाली फोटो और कूल से कुछ जवाबों और बायो पर जज होते हो सब। मेरा मानना है कि इंसान की सही पहचान समुदाय के बीच में उसके व्यवहार से होती है ना की उसकी प्रोफाइल पर चार लिखी लाइनों से। 😅

अब आप सोचें जब समुदाय के बगैर इंसान की सही पहचान ही नहीं होगी तोह बातचीत और मिलने की आशा पूरी कैसे होगी?

आप सब से निवेदन है की, आप इन डेटिंग एप्प्स का अपनी समझ और सहूलियत के हिसाब से इस्तेमाल करें। इन डेटिंग एप्प्स से हुई किसी भी प्रकार की मानसिक क्षति को अपने ऊपर हावी ना होने दें।
और हाँ, इन डेटिंग एप्प्स पर कैसे ज्यादा मैच या लाईक लाने हैं, इसका ज्ञान मुझे तोह बिलकुल ना दें। आप जो भी कॉपी-पेस्ट ज्ञान देने वाले है, वो मैंने पहले से ही पढ़कर, एक्सपेरीमेंट कर लिए हैं। 😉

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