मैं जब 8th क्लास में था, तब हमें एक क्लास प्रोजेक्ट मिला था- Write 10 line about your Idol in life
मेरे क्लास प्रोजेक्ट की सबसे ज्यादा तारीफ़ हुई थी। मैंने अपने प्रोजेक्ट में मेरे दादा जी पर लिखा था। मुझे विश्वास है की वो प्रोजेक्ट अच्छा मेरे द्वारा लिखी उन 10 lines के लिए नहीं थी। जबकि वो 10 lines में जो मेरे दादा जी की अद्भुत छवि और उनके संघर्ष का वर्णन जो दिखा वो सबका पसंद आया।

मेरे Idol अब हमारे बीच नहीं रहे। हरि इच्छा प्रबल है।
ईश्वर ने ये आकस्मित परिस्थिति में जो हमें डाला है, उसकी कल्पना कभी नहीं की थी हमनें।

मेरे दादा जी वो प्रसिद्ध इंसान थे, जिनका अपने परिवार और समाज दोनों पर बहुत ही ज़बरदस्त प्रभाव रहा है। मैं आपको सच बता रहा हूँ, जब कभी कोई मेरी तारीफ करता है, उसका सीधा श्रेय मेरे दादा जी को जाता है। सब कुछ उनके द्वारा दिए गए संस्कार, विचार और सरल भाव के नतीजें से ही आज काबिल बन सका हूँ मैं।

समाज में उनका वर्चस्व किसी पोस्ट या धन के कारण नहीं बल्कि उनकी सेवा भाव के कारण था। वो समाज के प्रति इतने सम्पर्पित थे की उनके द्वारा किये सामाजिक कार्य के Positive Impacts आजीवन लोगों के जेहन में रहेंगे। उन्होंने अपने जीवन काल में किसान, जल विभाग कर्मचारी, वकील ,आर्मी में मेजर , निर्विरोध सरपंच ,राजस्थान कांग्रेस के बड़े पदों पर कार्य किये । मेरे दादा जी अनुभवों के मामले में सबसे धनी इंसान थे हमारे समाज में।

मेरे दादा जी सबकी बातें सुनते थे। जी हाँ, सबकी। फिर चाहे मेरे भाई-बहनों की बचकानी बातें हो या रिश्तेदारों की शिकयतें। सब लोग उनसे अपने दिल की बातें निसंकोच करते। मेरी दिनचर्या में तोह हमारे वार्तालाप के फिक्स स्लॉट हुआ करते थे। ब्रेकफास्ट पर मिलकर, सुबह के अख़बार पर चर्चा होती थी, फिर लंच पर मिलकर हम टीवी न्यूज़ और मेरे Office Work को लेकर डिसकस करते और रात के डिनर पर साथ में जेठालाल देखने के बाद, हम आध्यात्मिक, कर्म-कर्त्तव्य, जीवन-मरण जैसे Philosophical मुद्दों पर logical बातें करते।

सौभाग्य मेरा जो उनके आखरी पलों में, मैं उनके साथ था। जाते-जाते भी उनके चेहरे पर वो एक भीनी मुस्कान थी जो सदैव हमारे दिल और दिमाग में रहेगी।

मैं अपना हर ब्लॉग उन्हें सुनाता था, और वो हमेशा मुझे 2-3 सुझाव देते थे ब्लॉग को बेहतर करने के लिए। ये ब्लॉग लिखते समय, मेरे आंसुओं की धारा रुक नहीं रही है। ये आँसूं दर्द के नहीं, मेरे दादा जी की यादों के है। मुझे पूरा विश्वास है की ईश्वर को एक बेहतरीन इंसान की जर्रूरत हुई होगी जो स्वर्ग में भी लोगों और समाज कल्याण के लिए कार्य कर सकें।

अब वो हमें उप्पर से देखते रहेंगे और हम उन्हें अपनी यादों में।

मेरे दादा जी

4 thoughts on “Tribute to मेरे दादा जी

  1. वाकई में एक भले और नेक दिल सहायता करने वाली शख्सियत, हरि इच्छा प्रबल हैं इस पर किसी का जोर नही सही हैं । लेकिन इस तरह से एक दम चले जाना हमे विस्मित करता हैं झकझोर देता हैं । उस दिन शाम को 8:30 बजे तो मिले थे और रात को चले जाना एक लंबी यात्रा पर ।लगभग हर दो चार दिन में एक बार बात होती थी और हर विषय पर । बस अब यादे और वो चेहरा ….. भगवान उन्हें अपने चरणों मे स्थान दे । ॐ

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  2. मेजर साहब हम सब के लिए आदर्श थे हमने उन्हें कभी ग़ुस्सा करते नही देखा वीरू के साथ मूँजें भी भांजे सा प्यार दिया
    कोटि कोटि नमन

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