अरेंज मैरिज और बेसिक सवाल

अभी ना अपन उस उम्र में आ गए जब "शादी कर लो" का नारा घर और समाज दोनों में लगने शुरू हो गए है। ये वो ही दौर होता है जब सबको लगता है की आपके सेटल होने से ही आपके जीवन का कल्याण हो सकेगा। कितना कल्याण होगा ये तोह कोई गारंटी नहीं करता … Continue reading अरेंज मैरिज और बेसिक सवाल

मेस का खाना

एक छोटा भाई है हमारा गुड्डू , कॉलेज जाने के लिए एकदम तैयार। पर कोरोना के चक्कर में मुश्किल ही है की उसे कॉलेज जाना पड़े। कल थोड़ा आत्मा चिंतन के मूड में था वो, पूछा उसने की, "भईया कॉलेज ना जाने से जीवन में क्या मिस होने वाला है?" प्लास्टिक कुर्सी पर बैठे, अखभार … Continue reading मेस का खाना

एक सच सुनोगे

सच कड़वा होता है ये कहावत तो हम सबने सुनी है। मोहल्ले के कुछ लोग, स्कूल के कुछ साथी व टीचर्स और कॉलेज में कुछ मित्रोजनो के द्वारा एक सच मुझे भी कड़वा लगता था , जब वो मुझे अति आत्मविश्वासी बुलाते थे। हमेशा नहीं पर कभी-कभी इस बात को सुनकर बुरा लग ही जाता … Continue reading एक सच सुनोगे

दास्तान-ऐ-पजामा

जैसा की मैं कई बार बता चुका हूँ की कॉलेज (आईआईटी रुड़की) में अपना भोकाल अप्पार था। घमंड की बात नहीं है, बस ये है की वो भोकाल भी मेहनत से बना था। लोगो से अच्छे रिश्ते बनाना, मदद लेना और करना और उनके साथ व्यवहार रखना, ये सब मुझे पसंद भी था और मैंने … Continue reading दास्तान-ऐ-पजामा

पोर्न एजुकेशन

2008 की बात है जब मोहल्ले में एक भैया के पास मोबाइल रहता था। शाम के क्रिकेट के बाद, जब सब लोग घर निकल जाते थे, तब मोबाइल वाले भैया के साथ 2-3 लोग ग्राउंड के एक कोने में 15-20 मिनट रुकते और फिर घर निकलते। ऐसे ही एक दिन मोबाइल वाले भैया ने मुझे … Continue reading पोर्न एजुकेशन

Thank you, MS

For the excellent service, you did as a player & a Captain for our nation. During your service, you built a culture that promoted cross-learning experiences over the senior-junior hierarchy. You pushed for fitness, being an essential element in the team's preparations. The way you managed the transition from the Ganguly's era to Virat's era … Continue reading Thank you, MS

घर वापसी

हमारे घर के सामने एक पार्क है जो की हमारे खेलने वाले दिनों में हमारे लिए लॉर्ड्स ग्राउंड से कम नहीं था। आज भले ही हम संडे को फ्री रहते है, पर उस ज़माने का संडे, क्रिकेट मैचों में फुल बिज़ी निकलता था। उन दिनों में, ना गर्मी, ना ठंड, कोई हमें खेलने से रोक … Continue reading घर वापसी

सही फैसला

हर रोज़ की तरह JNU लाइब्रेरी से ठीक 12:30 के बाद अपन कावेरी मेस में लंच के लिए निकल लिए। 4 कदम निकला ही था कि एक मित्र मिल गया और 2 मिनट का वार्तालाप 1 घंटे की चर्चा में बदल गया। 1:30 बज चुके थे और अब मेस की लाइन में खड़ा होने का … Continue reading सही फैसला

अगली जीत

सालों पहले एक जीत मिलीउस जीत के लिए संघर्ष भी कियाफिर वो दिन आ गया जबमेहनत और किस्मत ने अपना कमाल दिखा दिया| जीत के बादकाफी शोहरत मिली और नाम हुआनए और काबिल लोगो के साथ मिलना-जुलना शुरू हुआनए रास्ते भी खुले जिससे जीवन में काफी आराम हुआ| इस जीत ने काबिल और समझदार भी … Continue reading अगली जीत

टीटीई साहब और तनाव

कल मुंबई से जोधपुर के लिए सूर्यनगरी एक्सप्रेस में बैठा था। कोरोना जैसी आपदा के बीच घर जाने का उत्साह भी था और थोड़ा डर भी। ट्रैन में भी माहौल थोड़ा गंभीर सा था। मेरे लिए सफर बिना किसी के साथ बातचीत हुए थोड़ा मुश्किल सा निकलता है। ट्रैन में फ़ोन का नेटवर्क भी भगवान् … Continue reading टीटीई साहब और तनाव