मेहनत वो सिद्धांत है जिसका पाठ हमें बचपन से पढ़ाया जा रहा है। परीक्षा में अव्वल आना हो या करियर की रेस जीतना, बिना परिश्रम के कुछ हासिल नहीं हो सकता। किसी भी सफलता के पीछे मेहनत का योगदान हम सब समझते हैं। पर जैसे ही इंसान असफल हो जाता है तोह उसकी मेहनत को कठघरे में खड़ा कर दिया जाता है। बिलकुल हो सकता है की मेहनत ना करना उसकी असफलता का कारण रहा होगा। पर जो मेहनत करके असफल होता है उसकी मेहनत को दरकिनार या अपमानित क्यों कर दिया जाता है?

मैं मेहनत को कार्यों की सफलता से परे देखता हूँ। खाना बनाना मुझे जीवन का सबसे मेहनत वाला काम लगता है। एक स्वादिस्ट भोजन, मेहनत के बगैर बन ही नहीं सकता। अच्छा खाना बनाने वालों को मैं बहुत मेहनती मानता हूँ। जो भी लोग सफाई करते हैं वो भी अत्यंत मेहनती होते हैं। दुनिया समझें या ना समझें उन्हें अपने काम की गरिमा का एहसास होता है इसलिए घर हो या गली उसे साफ़-सुथरा रखने में श्रम करते है। गज़ब मेहनती होते हैं सामान बेचने वाला। सामन बेचने वाला ग्राहक के नखरे से लेकर खरी-खोटी तक सुनता है पर सामान बेचते वक़्त अपने परिश्रम में कोई कमी नहीं रखता।

इसी प्रकार, दुनिया के हर काम के लिए मेहनत लगती है। और ये सारी मेहनत सफलता पाने के लिए नहीं बल्कि खुद की और अपनों की उत्तरजीविता के लिए की जाती है। शिद्दत से काम करना, प्रदान करना, दूसरों पर भरोसा करना और दूसरों का भरोसा जीतने में भी मेहनत लगती है। मेहनत केवल लोगों की सफलता तक सीमित नहीं है। मेहनत का स्वरुप बहुत विशाल होता है। इसलिए कभी असफलता के समय में कोई हमारी मेहनत को दरकिनार कर दें पर हमें अपनी मेहनत पर गर्व होना चाहिए। क्यूंकि जिसने मेहनत करने का पाठ सीख लिया उसने इस संसार में उत्तरजीविता का तरीका समझ लिया।

P.S- अपने आने वाले कल के लिए दिक्कत ना कर, इसलिए थोड़ी मेहनत कर और थोड़ी मशक्कत कर।
#30_DAYS_SERIES

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