वो गाँव वाले तारें

वो गाँव वाले तारेंजिन्हें मैं घंटो निहारा करताजब खुले आसमान के नीचे गाँव में सोया करता | वो गाँव वाले तारेंमुझसे बयां करते कीदेख हम इतने सारे हैंहम सबका अस्तित्व हमारी खुद की चमक से हैंअगर हम टूटते भी है तोह किसी की चाहत पूरी करते हैंहम कुछ गुच्छों में रहते है और कुछ तोह … Continue reading वो गाँव वाले तारें

दिल्ली वाली

आज सुबह 11 बजे की ही बात है, मैं मार्केट से वापस आ रहा था घर का कुछ सामान लेकर। मैं अपने इलेक्ट्रिक (EV) स्कूटी पर था और नेहरू पार्क के चौराहे को क्रॉस करने ही वाला था की दूसरी तरफ से महिंद्रा की थार गाड़ी आ रही थी। मैंने अपनी EV स्कूटी रोक ली … Continue reading दिल्ली वाली